आज के डेक्कन क्रानिकल समाचार पत्र में दक्षिण की प्रख्यात अभिनेत्री से YSR congress की नेत्री बनी रोजा का बड़ा ही ऊटपटाँग बयान पढने को मिला।ऎसा लगता है रोजा सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किसी हद तक जा सकती हैं। औरतों से जुड़ी हुई बहुत सारी समस्याएँ एवं मुद्दे हैं जिन पर ध्यान दिया जा सकता है तथा सकारात्मक ढंग से इसे सदन में इसे उठाया जा सकता है। सुर्खियों में बने रहने के लिए यह चारित्रिक एवं नैतिक अधो:पतन की पराकाष्ठा नहीं तो और क्या है।
बुधवार, 25 मार्च 2015
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समय के लिए कुछ और तय नहीं
स मय के लिए कुछ और तय नहीं सिवा इसके कि यह बीत जाता है लेकिन जो बीतता नहीं लौटता रहता है वह भी कोई समय ही था ज्यों तुम समय की तरह बीत चुके...
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