दो सहेलियाँ मुद्दतों बाद मिली बतकही मे उलझी-सी ❤️ |
वैसे तो इंद्रप्रस्थ नगरी की तमाम
तस्वीरें अच्छी हैं और स्मृतियों को दुहराकर अच्छा लग रहा पर बबीता के साथ की ये
कुछ तस्वीरें कुछ बबीता ने कुछ मैंने और कुछ आग्रह पर वहाँ पर उपस्थित लोगों ने खींच दी सब तस्वीरें कमाल है। मन खुश हो जा रहा। जैसे जैसे हम बड़े
हुए बबीता से दोस्ती पक्की हुई। पुरानी हुई और लगा जैसे जीवन यात्रा पर हम कहीं न
कहीं समानांतर ही चल रहे। बाकी सबसे मिलकर ऊष्मा, स्मृतियां और अच्छा लगना होता है। उसके साथ अपना जैसा। यह अपने आप में
एक सुंदर बात है।
वैसे शाम तक हम घूमते रहे । चटख
तस्वीरें दिनों तक मन अच्छा रखेंगी। महीने साल-दर-साल स्मृतियों में जीवंत रहेंगी | बनी रहो ऐसी ही ❤️..। बने रहेंगे हम भी ❤️ |
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