गुरुवार, 28 अगस्त 2025

हैदराबाद की सड़कों पर कहीं

 बारिश होकर जा चुकी है थोड़ी फुहारें अभी भी बाँकी हैं । आसमान नीला और धुला हुआ दिख रहा है । पत्ते अपने अलग अलग हरे रंग में चमक रहे हैं । नाले भी कुछ इठलाती हुई है। सड़कों पर थोड़ा पानी है पर थोड़ा ही। जाने क्यों मन भरा हुआ है। रात सपने में बहुत चलना हुआ। उसी की थकन होगी। वरना बारिशें किस मन को धो पोंछ नहीं देती?

यूँ तो यह हैदराबाद का सबसे सुंदर हिस्सा नहीं पर बारिश ने इसे भी थोड़ा संवार दिया।
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परंपराओं को वक़्त के हिसाब से बदलना चाहिए

 यूँ तो शिव के अनंत रूप हैं पर पार्वती वल्लभं सर्वाधिक काम्य है। पार्वती ने शिव की अन्यमनस्कता, पिता की इच्छा और सामाजिक परिस्थितियों, अन्य बेहतर विकल्पों की मौजूदगी के बावजूद अपने प्रेम में उनका वरण किया और विवाह के बाद भी भूतनाथ को उनके स्पेस में वह रहने दिया जो वह थे। व्यक्तिगत स्वायत्ता और प्रेम का ऐसा मेल आकर्षित करता है।

खैर! यह मेरी रीरिडिंग है शिव-पार्वती की कथा का।
बाकी व्रतों/कथाओं/परंपराओं को वक़्त के हिसाब से बदलना चाहिए ही।




समय के लिए कुछ और तय नहीं

  स मय के लिए कुछ और तय नहीं सिवा इसके कि यह बीत जाता है लेकिन जो बीतता नहीं लौटता रहता है वह भी कोई समय ही था ज्यों तुम समय की तरह बीत चुके...