गुरुवार, 22 जनवरी 2026

विविधताओं के चितेरे -विनोद कुमार शुक्ल






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समय के लिए कुछ और तय नहीं

  स मय के लिए कुछ और तय नहीं सिवा इसके कि यह बीत जाता है लेकिन जो बीतता नहीं लौटता रहता है वह भी कोई समय ही था ज्यों तुम समय की तरह बीत चुके...