कभी कोई परफ्यूम खोजों और न मिले तो मुझे पुकारना , मेरा मन तुम्हारी खुशबुओं का अजायबघर है |
टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.
अनुवाद हमेशा मुश्किल दिनों में किसी दवा की गोली सा बनकर आता है। पढ़िए लिथुवानिया की कवि औश्रा कज़िलियनटे की वसंत से सम्बंधित कविताएँ। इन कवि...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.