कभी कोई परफ्यूम खोजों और न मिले तो मुझे पुकारना , मेरा मन तुम्हारी खुशबुओं का अजायबघर है |
टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.
स मय के लिए कुछ और तय नहीं सिवा इसके कि यह बीत जाता है लेकिन जो बीतता नहीं लौटता रहता है वह भी कोई समय ही था ज्यों तुम समय की तरह बीत चुके...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी: केवल इस ब्लॉग का सदस्य टिप्पणी भेज सकता है.