मंगलवार, 27 जनवरी 2026

 

कभी कोई परफ्यूम खोजों और न मिले तो मुझे पुकारना , मेरा मन तुम्हारी खुशबुओं  का अजायबघर है |




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समय के लिए कुछ और तय नहीं

  स मय के लिए कुछ और तय नहीं सिवा इसके कि यह बीत जाता है लेकिन जो बीतता नहीं लौटता रहता है वह भी कोई समय ही था ज्यों तुम समय की तरह बीत चुके...